Connect with us

Bihar k mati ke Lal

वैजयंती की तीन बेटियों ने कर दिखाया कमाल, बन गईं एक मिसाल

Published

on

721 Views

ये कहानी लगती फिल्मी है, मगर है सच. एक साधारण महिला का सपना जिसे उसकी तीन बेटियों ने पूरा कर दिखाया. ये कहानी है उस महिला वैजयंती की जिसका बचपन से सपना था कि वह अपने भाइयों की तरह वर्दी पहने, मगर आर्थिक मजबूरियों के कारण 12वीं से आगे की पढ़ाई नहीं कर सकीं. शादी हुई और समय बीतता गया. सोचा, बेटे को वर्दी में देखकर अपना सपना जी लेंगी, मगर यह भी नहीं हो सका. भगवान ने वैजयंती को चार बेटियां ही दीं, लेकिन वैजयंती ने बेटियों को बेटों की तरह पाला. पढ़ाया-लिखाया और अपने साथ दौड़ाया भी. परीक्षा दिलवाने कंधे पर टाइपराइटर ढोकर जाती रहीं. एक मां की मेहनत का नतीजा अब सबके सामने है.

MUST READ: दुर्गापूजा :सप्तमी से दशमी तक पूरे शहर में लागू रहेगी विशेष ट्रैफिक व्यवस्था, कल से रूट प्लान देखकर घूमने निकलें

वैजयंती की बड़ी बेटी रवि रंजना पटना में महिला थाना प्रभारी है, दूसरी बेटी रवि किरण गुजरात सीआइएसएफ में इंस्पेक्टर तो तीसरी रवि रोशनी आरपीएफ में सब-इंस्पेक्टर है. वैजयंती जब अपनी तीनों बेटियों को वर्दी में देखती है, तो उसमें खुद को महसूस करती है. चौथी बेटी रवि रेणुका अभी पढ़ाई कर रही है. उसका सपना भी पुलिस अफसर बनने का है.

MUST READ: नवरात्रि 2018: मुंगेर की मां चंडिका के दरबार के काजल लगाने से ठीक होते हैं आंखों के रोग

वैजयंती ने अपनी बेटियों को कभी बेटों से कम नहीं समझा
55 वर्षीय वैजयंती कहती हैं कि न मैंने कभी बेटियों को बेटों से कम समझा और न बेटियों न यह महसूस होने दिया. चारों बेटियों की 10वीं तक की पढ़ाई कोइलवर में ही हुई. वहां सुबह-शाम जब फुर्सत मिलती, बेटियों को अपने साथ हाई स्कूल के ग्राउंड में दौड़ाने के लिए ले जाती.

समाज के लोग देते थे ताना, कभी ध्यान नहीं दिया
शुरुआती दिनों में बहनों को दौड़ लगाते देख आसपास के लोग ताना भी मारते थे, लेकिन हमने कभी इस ओर ध्यान नहीं दिया. आज वही लोग मेरी बेटियों का उदाहरण देकर अपने बच्चों को मैदान में दौड़ाने लाते हैं. 2009 में सबसे पहले बड़ी बेटी रवि रंजना को सब इंस्पेक्टर की भर्ती में सफलता मिली. इसके बाद दो अन्य बेटियां भी वर्दी पाने में कामयाब हो गईं.

MUST READ: नेपाल से सटे कई जिलों के रेलवे स्टेशन समेत उत्तर बिहार लश्कर-ए-तयबा के निशाने पर, अलर्ट जारी

बहनें एक दूसरे को बांधती हैं राखी
बात 2007 की है. रांची में टाइपिस्ट के पद के लिए वेकैंसी निकली थी. रवि रंजना को रांची परीक्षा देने जाना था. रवि रंजना के साथ पटना से रांची तक मां वैजयंती कंधे पर टाइपराइटर मशीन टांगकर ले गई. रवि रंजना कहती हैं कि हम हर साल राखी मनाते हैं. भाई को न होने पर हम चारों बहनें आपस में ही एक दूसरे को राखी बांधते हैं.

MUST READ: नवरात्रि 2018: मां कात्यायनी की पूजा से मिलेगा मनचाहा वर, ये है मंत्र

बोलते थे पापा, रोते हुए कभी मत आना घर
महिला थाना प्रभारी रवि रंजना कहती हैं कि मेरे पिता रवि शंकर होम्योपैथ के डॉक्टर हैं. उन्होंने भी हमें हर तरह से सपोर्ट किया. रवि रंजना जब पहली बार घर से अकेले कोईलवर से बिहटा कॉलेज जाने के लिए निकलीं तो पिता ने दो टूक कहा कि आत्मनिर्भर बनना सीखो. तुम खुद को सशक्त कर सकती हो. घर पर कभी रोते हुए मत आना. रवि रंजना कहती हैं कि पिताजी की आमदनी ज्यादा नहीं थी. चारों बहनों की पढ़ाई का खर्च उठाने के लिए मां वैजयंती घर में ही सिलाई-कढ़ाई करती थी. मां को सिलाई करते देख चारों बहनें भी अपना कपड़ा खुद सिलने लगीं. इससे पैसे की बचत भी होती थी.

Bihar k mati ke Lal

बिहार की बेटी ‘बेबी’ बन गई एक दिन की कनाडा की हाई कमिश्नर

Published

on

बिहार के जमुई जिले की रहने वाली बेबी को ‘इंटरनेशनल गर्ल चाइल्ड डे’ के मौके पर एक दिन के लिए कनाडा का हाई कमिश्नर बनाया गया था. ये बिल्कुल वैसा ही था जैसे अनिल कपूर की फिल्म ‘नायक’ में उन्हें एक दिन के लिए मुख्यमंत्री बना दिया गया था. बेबी ने कभी नहीं सोचा था कि उसके जीवन में ऐसा दिन भी आएगा. बेबी का पूरा नाम बेबी कुमारी है और उसकी उम्र 21 साल है. न्यूज एजेंसी एएनआइ से बात करते हुए उन्होंने कहा- ‘ मेरे लिए एक बेहतरीन अनुभव है. मैंने सीखा है कि कैसे दूसरों के सामने खुद को पेश करना है साथ ही दूसरों के साथ कैसे जुड़ना है और बातचीत के बाद किसी भी समस्या को हल करना है.

MUST READ: बीजेपी के शत्रु वाराणसी से PM मोदी के खिलाफ लड़ेंगे चुनाव!

बेबी ने अपने गांव और आसपास के इलाकों में बालिकाओं के शैक्षणिक, आर्थिक और सामाजिक विकास के लिए काफी काम किया है. इसी के साथ बेबी ने गुजरात में बिहार और यूपी के लोगों पर हमलों के बारे में बात करते हुए कहा- ये बेहद दुखद है. अगर हमारे राज्य में ऐसी सुविधाएं होंगी तो हम सबको किसी भी दूसरे राज्य में जाने की आवश्यकता नहीं होगी. कनाडा का हाई कमिश्नर बनने के बाद उन्होंने कहा मैं कभी कनाडा नहीं गई हूं, इसे मैंने सिर्फ यूट्यूब पर ही देखा है. ये एक सुंदर देश है. आपको बता दें, बेबी की 17 साल की उम्र में शादी करवाई जा रही थी, जिसे उसने खुद अकेले ही रुकवा दिया था. वह बाल विवाह के खिलाफ हैं.

बेबी एक बहुत ही गरीब परिवार से ताल्लुक रखती हैं. उनके पिता किसान हैं. साढ़े चार फीट की बीए प्रथम वर्ष की छात्रा बेबी का हौसला बहुत ऊंचा है. बता दें, साल 2016 में बेबी कुमारी को भागलपुर गांव के समुदाय का नेता चुना गया था. बेबी कहती हैं कि अब उनके गांव की लड़कियां न सिर्फ पढ़-लिख रही हैं बल्कि अपने पैरों पर भी खड़ी भी हो रही हैं. बतौर कनाडा की हाई कमिश्नर, बेबी ने गुरुग्राम के एक स्कूल का दौरा किया. यहां उन्होंने देश में बालिकाओं की स्थिति पर चर्चा की. शाम को उन्होंने दिल्ली में आयोजित एक समारोह में हिस्सा लेकर बालिकाओं का हौसला बढ़ाया.

MUST READ: इस गांव के बच्चों से लकर बुजर्गों तक में है फुटबॉल का खुमार

हालांकि, समारोह में मुख्य अतिथि फिल्म स्टार अनिल कपूर थे लेकिन लोगों का ध्यान बेबी और उनके जैसी 18 अन्य लड़कियों पर ही था जो अलग-अलग देशों की एक दिन के लिए राजदूत बनाई गईं थीं. समारोह की थीम ‘हम बराबर हैं’ थी. बेबी ने कनाडा हाई कमीशन के पद पर बैठ कर बड़े-बड़े सवाल खड़े कर जमुईवासियों को गौरवान्वित होने का अवसर दिया. अति नक्सल प्रभावित इलाके के टिटहियां निवासी कारु राय की बेटी बेबी ने गुरुवार को केनेडियन हाई कमिश्नर का पद संभाला. इस दौरान उसने भारत सरकार और केनेडियन उच्चायुक्त से कुल तीन सवाल भी पूछे.

सवालों में उसने बेटियों की गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, सुरक्षा एवं नियोजन का मुद्दा उठाया. केनेडियन हाई कमिश्नर नादीर पेटर के समक्ष भारत से कनाडा पहुंचने वाले बेरोजगारों को शिक्षा के आधार पर जॉब नहीं मिलने का सवाल उठाकर निरुत्तर कर दिया. बेबी ने उक्त सवाल के अलावा भारत सरकार से भारत में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को सुनिश्चित करने में कितना वक्त लगेगा और कनाडा की तुलना में भारत में बालिकाओं की सुरक्षा कैसे बढ़ाया जाए जैसे परिपक्व सवाल उसके द्वारा किया गया.

Continue Reading

Bihar k mati ke Lal

मिसाल: ‘नाच बाजा डॉट कॉम’ स्टार्टअप के जरिये यह ट्रांसजेंडर अपने कम्युनिटी के लोगों को दे रही हैं रोजगार के मौके

Published

on

समाज में ट्रांसजेंडर समुदाय से जुड़े लोगों को कितनी उपेक्षा झेलनी पड़ती है, कहने की जरूरत नहीं. यह उपेक्षा ही वह वजह है कि समाज में लोगों के साथ उनका सरोकार बहुत सीमित ही देखने को मिलता है. वहीं एक ऐसी ट्रांसजेंडर हैं जो अपने कम्युनिटी के लोगों को रोजगार उपलब्ध करा रही है. उसका नाम है रेशमा प्रसाद. रेशमा पटना में रहती हैं और ट्रांसजेंडर वुमेन हैं और अपने समुदाय के सरोकारों के प्रति बेहद प्रतिबद्ध. इन दिनों नई दिल्ली के प्रगति मैदान में स्टार्टअप एक्सपो का आयोजन चल रहा है. पटना, बिहार से ट्रांसजेंडर वुमेन रेशमा प्रसाद भी यहां पहुंची हैं.

MUST READ: तेज प्रताप ने बिहार को बताया चुनावी कुरुक्षेत्र और खुद को श्रीकृष्ण

ट्रांसजेंडर वुमेन रेशमा की पहचान है और वह अपनी पहचान को छिपाती नहीं. उनका स्टार्टअप एक्सपो में आने वाले तमाम आगंतुकों सहित देश विदेश से आने वाले लोगों को हैरत में डाल रहा है. स्टाल पर थर्ड जेंडर की सक्रियता जहां पहली नजर में लोगों का ध्यान आकृष्ट कर रहा है वहीं उनकी जो स्टार्टअप है उसका थीम भी लोगों को लुभा रहा है. रेशमा और उनकी कुछ ट्रांसजेंडर फ्रेंड्स अपने स्टार्टअप ‘नाच बाजा डॉट कॉम’ लेकर यहां पहुंचे हैं.

रेशमा कहती हैं, ”नाच बाजा डॉट कॉम’ देश का पहला ट्रांसजेंडर स्टार्टअप है. आप जानते हैं कि ट्रांसजेंडर कम्युनिटी को लेकर समाज में कई मिसकन्सेप्शन हैं. लोग हमें उपेक्षा के भाव से देखते हैं. जबकि हम भी आम इन्सान हैं. हमारी भी संवेदनाएं हैं. हम भी समाज के बीच के ही लोग हैं. हम ऐसे बिल्कुल नहीं हैं जिन्हें हेय या तुच्छ समझा जाए. लेकिन दुर्भाग्य से समाज का नजरिया अभी भी बहुत कुछ भेदभाव वाला है. ऐसे में हम यह स्टार्टअप लेकर आए हैं. उम्मीद करते हैं यह स्टार्टअप ट्रांसजेंडर समुदाय को सम्मानजनक जीवन देने में सहायक साबित होगा.’

जैसा कि आप जानते हैं ट्रांसजेंडर समुदाय के लोग कला जगत से जुड़े होते हैं. नाचगाना उनकी आजीविका का प्रमुख साधन है. यह स्टार्टअप ट्रांसजेंडर समुदाय के लोगों कला का एक मंच उपलब्ध कराने का अनूठा बिजनेस मॉडल है. रेशमा ने बताया कि ‘नाच बाजा डॉट कॉम’ अभी आॅफलाइन ही है. काम चल रहा है. इसके इस साल दिसम्बर तक आॅनलाइन करने की कोशिश की जा रही है. पूरे देश के तकरीबन डेढ़ हजार ट्रांसजेंडर्स इससे जुड़ चुके हैं. उन्हें इसके जरिए काम दिलाने की दिशा में कार्य जारी है.

MUST READ: बोले नीतीश, कुछ लोग बैंक का पैसे लेकर भाग जाते हैं, लेकिन जीविका की बहने बैंक का कर्ज चुकाती है

आखिर उन्हें कैसे और क्या काम मिलेगा? रेशमा कहती हैं, ‘ ट्रांसजेंडर्स अपनी आजीविका के लिए डांस—म्यूजिक जैसे आर्ट फॉर्म से जुड़े ​होते हैं. उन्हें कहीं काम मिलता है तो उन्हें उतना पैसा नहीं मिल पाता है जितना मिलना चाहिए. ऐसा इसलिए क्योंकि ज्यादातर पैसा काम दिलाने वाले दलाल की जेब में चला जाता है. हमारे स्टार्टअप के जरिए यह व्यवस्था सुधर जाएगी. ट्रांसजेंडर कलाकारों को उनका वाजिब मेहनताना मिल पाएगा. कहीं से कोई दलाली नहीं जाएगी. वह पैसा भी आर्टिस्ट के ही हिस्से जाएगा. इससे उनका शोषण नहीं हो पाएगा और उन्हें खुशहाली भी मिल पाएगी.

रेशमा बताती है कि अब तक तकरीबन दो सौ ट्रांसजेंडर्स को काम दिलाया जा चुका है. सका है. आखिर कोई ट्रांसजेंडर्स कैसे इस व्यवस्था से लाभान्वित हो सकते हैं? रेशमा कहती हैं,’ कोई संस्था, आयोजक या व्यक्ति उनके वेबसाइट के जरिए उनसे संपर्क कर सकता है. काम करने को इच्छुक ट्रांसजेंडर्स भी हमसे संपर्क कर सकते हैं. हम उसे अपने वेबसाइट पर रजिस्टर्ड कर लेते हैं. और इस प्रक्रिया के लिए उनसे बस नाममात्र 100 रुपये एक सौ रुपये की फीस ली जाती है. वाकई एक वंचित समुदाय के व्यक्ति के द्वारा अपने समुदाय की उन्नति के लिए उठाए गए इस कदम की जितनी प्रशंसा की जाए कम ​है.

Continue Reading

Bihar k mati ke Lal

तंगी के चलते न बन सका डॉक्टर तो लिट्टी चोखा बेच अब कमाता है लाखों

Published

on

ये कहानी है बिहार के देवेंद्र सिंह की. जिन्होंने पढ़ाई पूरी करने और 7 सितारा होटल में काम करने के बाद लिट्टी का बिजनेस शुरू किया. जिसकी शुरुआत दिल्ली के ही लक्ष्मी नगर से की. जो कि आज दिल्ली में 6 जगहों पर बिकती है. पेश है उसी लिट्टी वाले की कहानी. ‘साल 1992 में 10वीं पास करने के बाद मेडिकल की तैयारी में जुटा था. पांच साल तक ये सिलसिला चलता रहा. फिर एक दिन बीआईटी एग्रीकल्चर में सिलेक्शन हुआ. कॉलेज मिल रहा था बिहार का, मोतिहारी. जो मुझे जमा नहीं’. मेरा नाम देवेंद्र सिंह है और आज मैं दिल्ली में Mr.Littiwala के नाम से जाना जाता हूं.

MUST READ: बिहार के छह युवा विश्व कौशल प्रतियोगिता में करेंगे देश का प्रतिनिधित्व

उन दिनों (90s) मेरा लक्ष्य मेडिकल की पढ़ाई करना था. पिताजी अमीर तो नहीं लेकिन पाई-पाई जोड़कर मुझे पढ़ाकर ही दम लेने वालों में से थे. इसलिए मैंने लक्ष्य बदला और होटल मैनेजमेंट करना चुना. उम्मीद थी इसमें जल्दी और अच्छा रोजगार मिलेगा. पैसा कमाकर परिवार की हर जरूरत पूरी करुंगा. रांची से होटल मैनेजमेंट किया और 1999 में दिल्ली आया. साल 1998 में अशोका होटल में ट्रेनिंग के लिए प्लेसमेंट हुआ, जो छह महीने के लिए था. ट्रेनिंग पूरी करने के बाद रांची वापस गया. पढ़ाई पूरी की. पास होते ही कॉन्ट्रेक्ट के आधार पर काम सीखने के लिए दिल्ली का अशोका होटल दोबारा जॉइन किया. एक साल वहां काम सीखा. इसमें कॉमी का रोल मिला, जिसमें आटा गूंथने से लेकर सब्जियां काटना, रसोईघर की साफ-सफाई करना, कोयला जलाना, जैसे काम किए.

MUST READ: पत्नी ऐश्वर्या नहीं सारण के चुनावी दंगल में स्वयं उतरेंगे तेज प्रताप

ये बात 2002 की है. एक किचन हेल्पर की तरह काम करने के बाद ताज में नौकरी लगी. वहां एक साल काम किया. पैसा अच्छा मिला तो होटल ग्रैंड हयात जॉइन किया. ये साल 2003 की बात है. सीडीपी (टेबल पर ऑर्डर लगाने वाला व्यक्ति) की तरह काम किया. डेढ़ साल ऐसे ही बीत गया. लेकिन होटल बंद हो गया. 2003 में शादी करने का फैसला लिया. शादी के बाद नौकरी विशाल मेगामार्ट में लगी. यहां मैंने पूरे भारत में करीब 55 फूड कोर्ट खोले. मोटे तौर पर समझाऊं तो विशाल मेगामार्ट में फूड कोर्ट की चैन मैंने खोली. यहां सात साल, 2010 तक काम किया. इसमें बेकरी से लेकर छोले-भटूरे, साउथ इंडियन, नॉर्थ इंडियन, चाइनीज हर तरह के खाने की दुकान खोली. और चलाया भी.
दिल्ली में बड़ी तादाद में देश के बाकी राज्यों की तरह बिहार के लोग भी रहते हैं. फिर भी वे अपने यहां का मशहूर लिट्टी चोखा खाने की बजाए साउथ इंडियन, छोले-भटूरे, चाट-पापड़ी जैसी चीजें खाते हैं. लिट्टी इतनी हेल्दी है फिर भी लोगों को दिल्ली में मिल नहीं पाती. 1999 से 2010 तक 11 सालों में बड़े-बड़े होटलों में काम किया. खूब फूड कोर्ट खोले, ठेलों के चाट-पकौड़े भी खाए लेकिन कभी-भी किसी अच्छे बड़े साफ-सुथरे रेस्त्रां के मेन्यू में मैंने लिट्टी नहीं देखी थी.

तभी जहन में बैठा लिया था देश की राजधानी दिल्ली में लिट्टी चोखा को ब्रांड बना मशहूर करुंगा. साल 2010 में नौकरी छोड़ी. तब 70 हजार तन्ख्वाह थी. पहला आउटलेट लक्ष्मी नगर में खोला. खुद के दम पर कपंनी को खड़ा किया. लोग हंसे, मजाक उड़ाया. यहां तक कि परिवार वालों ने भी साथ न दिया. पर मैंने किसी की नहीं सुनी. 45 हजार के किराए पर दुकान ली. पांच साल लक्ष्मी नगर में काम किया. इन सालों में दुकान का किराया दोगुना यानी 90 हजार हो चुका था. सालभर में काम जमने लगा था. सभी से सराहना मिली. परिवार ने खुली बांहों से स्वागत किया. जिस लिट्टी का काम करने के लिए परिवार ने मुझे लगभग बेदखल कर दिया था. उसी लिट्टी से नाम, शौहरत, पैसा इज्जत, सब मिला. लिट्टी सबसे ज्यादा नवंबर में बिकती है. एक सीजन में 10 लाख के करीब कमा लेता हूं. मई, जून और जुलाई, तीन महीने लिट्टी का कारोबार कम रहता है.

MUST READ: बेउर जेल में पुलिस की छापेमारी, कैदियों में मचा हड़कंप

ग्राहक मेरी लिट्टी पर विश्वास रखते हैं. लिट्टी का सत्तू बिहार से ही मंगाता हूं, ताकि मिट्टी की सौगंध उसमें शामिल रहे. कोयले पर बनाता हूं. क्वॉलिटी के साथ कोई भी समझौता नहीं करता. मेरी दुकान चलने के बाद बहुत-सी कंपनियां आईं. लिट्टी में चिकन, मटन, कीमा, पनीर, चाउमीन सब भरकर परोसा लेकिन नहीं चला. उल्टे पैर वापस चली गईं. और देवेंद्र सिंह की दिल्ली में मौजूद लिट्टी के 6 ठिकानों की बात करें तो वे प्रीत विहार डीडीए मार्केट, आनंद विहार रेलवे स्टेशन, लाजपत नगर सेट्रल मार्केट, लक्ष्मी नमग, बिहार निवास, निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन तक पहुंचता है. क्वॉलिटी सभी लिट्टी की एक जैसी रहे इसलिए बेस किचन प्रीत विहार में है.

MUST READ: IRCTC घोटाला: व्यकटेश ने कहा, तेजस्वी यादव ​को अभी नहीं मिली दोष से मुक्ति

स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद लिट्टी, कैसे
लिट्टी, रिफाइंड में नहीं बनती और न ही ये तली हुई कोई चीज है. शरीर पर इसका कोई साइड इफैक्ट नहीं है. इससे बीपी, शुगर और पेट, तीनों चीजें स्वस्थ रहती हैं. सत्तू में इंसुलिन मात्रा काफी होती है, लिट्टी खाने से शरीर को कई फायदे मिलते हैं. पेट साफ होता है.

Continue Reading
Advertisement
Trending1 year ago

कल आ रहे राष्ट्रपति बिहार, मिनट टू मिनट का जाने उनका कार्यक्रम

Politics1 year ago

NDA से मिली चोट ने उपेन्द्र और अरुण को फिर किया एक, महागठबंधन में जाने की तैयारी!

Politics1 year ago

दुर्भाग्य है कि मुझे बिहारी कहा जाता है: कीर्ति आजाद

Politics1 year ago

कुशवाहा के समर्थन में आए सीपी ठाकुर, कहा- उनके जाने से NDA को नुकसान

Politics1 year ago

VIDEO: बिहार आने का साहस नहीं अल्पेश ठाकोर में: सुशील मोदी

CRIME1 year ago

छठ पर्व की भारी सुरक्षा के बीच RLSP के प्रखंड अध्यक्ष की गोली मारकर हत्या

Politics1 year ago

NDA ने ‘बागी’ उपेंद्र कुशवाहा को दिया ‘बड़ा झटका’, एक भी सीट नहीं दी जाएगी- सूत्र

Trending1 year ago

बाल दिवस विशेष: कानून की भाषा में भी ‘बच्चे’ की परिभाषा अलग-अलग

Uncategorized1 year ago

बिहार समेत पूरे देश भर में दिया गया उदीयमान भगवान भास्कर को अर्घ्य

Trending1 year ago

लालू के कन्हैया की फिर बिगड़ी तबीयत, बिना खाए-पिए नंगे पांव की गोवर्धन पर्वत की परिक्रमा

Trending1 year ago

माथे पर दउरा लेकर घाट पहुंचे चिराग, सुमो ने अहमदाबाद में किया छठ घाट का उद्घाटन

Trending1 year ago

CM नीतीश ने दी छठ की शुभकामनाएं, घाटों का किया निरीक्षण, कहा: महापर्व से सीखें आत्‍मानुशासन

Breaking News1 year ago

VIDEO: अस्‍ताचलगामी भगवान सूर्य को पहला अर्घ्‍य, नदी-तालाबों के तट पर उमड़ा आस्‍था का जनसैलाब

Jansarokar1 year ago

छठ महापर्व : खरना संपन्न, 36 घंटे का निर्जला व्रत शुरू

Trending1 year ago

रामविलास पासवान के घर अगले साल बजेगी शहनाई, चिराग बनेंगे दुल्हा

Videos1 year ago

Krishna Janmashtami 2018: जन्माष्टमी की रात करें ये खास उपाय, पूरी होंगी मनोकामनाएं

Videos1 year ago

बिहार के कांग्रेस विधायक की बेटी बनी जॉन अब्राहम की हीरोइन, देखें HOT PHOTO VIDEO

Videos1 year ago

Video: स्वतंत्रता दिवस पर कोहली ने धवन, पंत संग देशवासियों को दिया विराट ‘Challenge’

Trending1 year ago

Video: नहीं रहे पलामू के धरती पूत्र पूर्व राज्यपाल भीष्म नारायण सिंह

Videos1 year ago

अकेले में देखें देशी गर्ल PRIYANKA CHOPRA की यह VIDEO, जगा देगी मर्दांगी

Videos1 year ago

BJP और NDA भगाओ साइकिल यात्रा से पहले खुद ही साइकिल से गिर पड़े तेजप्रताप

Videos1 year ago

बिहार की शान ISHAN KISHAN हुए 20 के, चाहने वालों ने केक काटकर मनाया जन्मदिन

Videos1 year ago

दो-दो लड़कों से प्रेम करना हिना खान को पड़ गया महंगा

Bollywood1 year ago

शादी के बाद नेहा धूपिया ने बिखेरे हॉटनेस के जलवे, सेक्सी वीडियो वायरल

Videos1 year ago

जानें क्यों माही ने कहा उनमें कॉमन सेंस नहीं

Astrology1 year ago

तुला वालों को आज मिल सकता है प्रमोशन, देखें आपके राशिफल में है क्या?

Uncategorized2 years ago

Biharimati wishes Happy New Year नव-वर्ष की पावन बेला में है यही शुभ संदेश हर दिन आये आपके जीवन में लेकर खुशियां विशेष.

Bihar2 years ago

कैबिनेट की मीटिंग हुई खत्म, तेजस्वी का नहीं आया कोई फैसला

Sports2 years ago

Boxing continues to knock itself out with bewildering, incorrect decisions

Trending

Copyright © 2018 Biharimati Powered by Leadpanther.