Connect with us

Article

देवोत्थान एकादशी सोमवार को, शुरू होंगे सभी मांगलिक कार्य, जानें शुभ मुहूर्त और पूजन विधि

Published

on

681 Views

देवउठनी एकादशी को हरि प्रबोधिनी एकादशी या फिर देवोत्थान एकादशी के नाम से भी जाना जाता है. देवशयनी एकादशी से चार माह के लिए भगवान विष्णु क्षीर सागर में सोने चले जाते हैं. इसके बाद देवउठनी एकादशी के दिन वह फिर जाग्रत हो जाते हैं. इस तिथि से ही सारे शुभ काम जैसे, विवाह,  मुंडन और अन्य मांगलिक कार्य होने शुरू हो जाते हैं. एकादशी के दिन शलिग्राम से तुलसी विवाह भी किया जाता है. देवउठनी एकादशी के दिन से शादियों का शुभारंभ हो जाता है. सबसे पहले तुलसी मां की पूजा होती है. देवउठनी एकादशी के दिन धूमधाम से तुलसी विवाह का आयोजन होता है. तुलसी जी को विष्णु प्रिया भी कहा जाता है, इसलिए देव जब उठते हैं तो हरिवल्लभा तुलसी की प्रार्थना ही सुनते हैं.

देवउठनी एकादशी के दिन तुलसी जी का विवाह शालिग्राम से किया जाता है. अगर किसी व्यक्ति को कन्या नहीं है और वह जीवन में कन्या दान का सुख प्राप्त करना चाहता है तो वह तुलसी विवाह कर प्राप्त कर सकता है. इस बार देवउठनी एकादशी 19 नवंबर सोमवार को है.
इसके पीछे एक कथा है कि जलंधर नाम का एक पराक्रमी असुर था, जिसका विवाह वृंदा नाम की कन्या से हुआ. वृंदा भगवान विष्णु की परम भक्त थी. इसी कारण जलंधर अजेय हो गया. अपने अजेय होने पर जलंधर को अभिमान हो गया और वह स्वर्ग की कन्याओं को परेशान करने लगा. दुःखी होकर सभी देवता भगवान विष्णु की शरण में गए और जलंधर के आतंक को समाप्त करने की प्रार्थना करने लगे. भगवान विष्णु ने अपनी माया से जलंधर का रूप धारण कर लिया और छल से वृंदा के पतिव्रत धर्म को नष्ट कर दिया. इससे जलंधर की शक्ति क्षीण हो गई और वह युद्ध में मारा गया.

जब वृंदा को भगवान विष्णु के छल का पता चला तो उसने भगवान विष्णु को पत्थर का बन जाने का शाप दे दिया. देवताओं की प्रार्थना पर वृंदा ने अपना शाप वापस ले लिया, लेकिन भगवान विष्णु वृंदा के साथ हुए छल के कारण लज्जित थे, अतः वृंदा के शाप को जीवित रखने के लिए उन्होंने अपना एक रूप पत्थर रूप में प्रकट किया जो शालिग्राम कहलाया. भगवान विष्णु को दिया शाप वापस लेने के बाद वृंदा जलंधर के साथ सती हो गई. वृंदा के राख से तुलसी का पौधा निकला. वृंदा की मर्यादा और पवित्रता को बनाए रखने के लिए देवताओं ने भगवान विष्णु के शालिग्राम रूप का विवाह तुलसी से कराया.

इसी घटना को याद रखने के लिए प्रतिवर्ष कार्तिक शुक्ल एकादशी यानी देव प्रबोधनी एकादशी के दिन तुलसी का विवाह शालिग्राम के साथ कराया जाता है. शालिग्राम पत्थर गंडकी नदी से प्राप्त होता है. भगवान विष्णु ने वृंदा से कहा कि तुम अगले जन्म में तुलसी के रूप में प्रकट होगी और लक्ष्मी से भी अधिक मेरी प्रिय रहोगी. तुम्हारा स्थान मेरे शीश पर होगा. मैं तुम्हारे बिना भोजन ग्रहण नहीं करूंगा. यही कारण है कि भगवान विष्णु के प्रसाद में तुलसी अवश्य रखा जाता है. बिना तुलसी के अर्पित किया गया प्रसाद भगवान विष्णु स्वीकार नहीं करते हैं.

Article

बैशाखी पर्व मनाने की क्या है परंपरा और महत्व

Published

on

सिख समुदाय का महत्वपूर्ण पर्व बैशाखी 13 और 14 अप्रैल को मनाई जाएगी. बैशाखी का त्योहार फसलों के तैयार होने और खालसा पंथ की स्थापना के रूप में मनाई जाती है. आइए जानते हैं बैशाखी पर्व का महत्व.

आज है सतुआन, बिहार और भोजपुर का लोक पर्व

खालसा पंथ की हुई थी स्थापना
जिस कारण बैसाखी को सबसे ज्यादा महत्व दिया जाता है वह खालसा पंथ की स्थापना है. गुरु गोबिंद सिंह ने सन 1699 में इसी दिन आनंदपुर साहिब में खालसा पंथ की नींव रखी थी. पंथ की स्थापना का उद्देश्य समाज को शासकों के अत्याचारों से मुक्त कर उनके जीवन को श्रेष्ठ बनाना था. सिख पंथ के प्रथम गुरु नानकदेव ने भी वैशाख माह की आध्यात्मिक साधना की दृष्टि से काफी प्रशंसा की है, इसलिए पंजाब और हरियाणा सहित कई क्षेत्रों में बैसाखी मनाने के आध्यात्मिक सहित तमाम अन्य कारण भी हैं. गुरु गोबिंद सिंह ने गुरु के बलिदान के बाद, धर्म की रक्षा के लिए बैसाखी के दिन अलग-अलग जातियों, धर्मों और क्षेत्रों से चुनकर पंच प्यारों को अमृत छकाया.

बैसाखी का हिन्दू धर्म से संबंध
अधिकांश पर्व-त्योहार मौसम, मौसमी फसल और उनसे जुड़ी गतिविधियों से ही संबंधित हैं. भारत में महीनों के नाम नक्षत्रों पर रखे गए हैं। बैसाखी के समय आकाश में विशाखा नक्षत्र होता है. विशाखा नक्षत्र पूर्णिमा में होने के कारण इस माह को वैशाख कहते हैं. इस प्रकार वैशाख मास के पहले दिन को बैसाखी कहा गया है और पर्व के रूप में माना गया है.

बैसाखी का महत्व
बैसाखी अप्रैल में तब मनाया जाता है, जब सूर्य मेष राशि में प्रवेश करता है. इसी समय सूर्य की किरणें गर्मी का आगाज करती हैं. इन किरणों के प्रभाव से जहां रबी की फसल पक जाती है, वहीं खरीफ की फसल का मौसम शुरू हो जाता है. इस पर्व की धार्मिक और आध्यात्मिक मान्यता भी काफी है. लोग देवी-देवताओं की पूजा करते हैं. पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, उत्तरी राजस्थान और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में जहां बैसाखी के रूप में उल्लास का रंग दिखता है, तो उत्तर-पूर्वी भारत के असम आदि राज्यों में बिहू पर्व मनाया जाता है.

Continue Reading

Article

आज है सतुआन, बिहार और भोजपुर का लोक पर्व

Published

on

हिंदुओं का चैत्र मासिक पर्व मेष संक्राति (सतुआन) रविवार को मनाया जाएगा. मेष राशि पर सूर्य रविवार को चला जाएगा. सूर्य के मेष पर आने पर ही सतुआन मनाने की महत्ता है. आज से सतुआन और बंगला नव वर्ष 1427 प्रारम्भ हो रहा है. बंगाल मे इसे पोइला बैशाख, चडक पूजा कहा जाता है. इसी दिन तमिल नववर्ष, केरल में विशु, उडीसा में मेष संक्राति, मणिपुर मे चेइरोबा, सती अनुसूया जयंती के रूप में मनाई जाती है. इसी के साथ खरमास की समाप्ति हो जाऐगी.

MUST READ: हार के डर से नया-नया शिगूफा छोड़ रहा है लालू परिवार: मंगल पांडेय

सतुआन भोजपुरी संस्कृति के काल बोधक पर्व है. हिन्दू पतरा में सौर मास के हिसाब से सूरज जिस दिन कर्क रेखा से दक्षिण के ओर जाता है उसी दिन यह पर्व मनाया जाता है. बिहार में इस पर्व को खास तरीके से मनाया जाता है. इस दिन लोग गंगा में स्नान करते हैं और दान पुन्य का काम करते हैं.

सनातन धर्म में मेष संक्रांति का बड़ा महत्व है.आज के दिन शीतल जल में स्नान का बड़ा महत्व है. मान्यता है कि शीतल जल में स्नान करने से गिरगिट व सर्प योनि में जन्म लेने से मुक्ति मिलती है. आज के दिन ब्राह्मणों को घड़ा के साथ सतुआ दान का विशेष महत्व है. इसके साथ शिवालयों में शिवलिंग के उपर घड़ा से जल गिराने का कार्य किया जाता है. मुख्य रूप से सत्तू, गुड़, चना, पंखा, मिट्टी का घड़ा, आम, ऋतुफल, अन्न दान करें. वैसे तो मान्यता यह भी है कि सत्तू व जल से भरे पात्र का दान करने से सभी पापों का नाश हो जाता है.

बुजुर्ग व्यक्ति ने Ashwini Kumar Chaubey को खरी खोटी सुना कर दिया पानी-पानी

बुजुर्ग व्यक्ति ने Ashwini Kumar Chaubey को खरी खोटी सुना कर दिया पानी-पानी #ashwini kumar chaubey https://youtu.be/mConvl8ETFo

Bihari Mati यांनी वर पोस्ट केले शनिवार, १३ एप्रिल, २०१९

इस पर्व को सतुआन के अलावा सत्तू संक्रांति भी कहते हैं. पंजाब में इसे वैशाखी त्योहार के रूप में मनाया जाता है. आज से ही बांग्ला नव वर्ष की शुरुआत हो गयी है. आज से मांगलिक कार्य का शुभारंभ हो गया है. चूंकि सूर्य उच्च राशि में प्रवेश कर गए हैं. अत: खरमास की समाप्ति हो गयी है. दूसरे महीनों की अपेक्षा इस महीने सूर्य ज्यादा प्रभावशाली होंगे. सूर्य का उच्च राशि में प्रवेश शुभ फलदायी है.

महाभारत के वन पर्व के अनुसार तब का काम्यक वन आज का बिहार में ककोलत है. पांडवों का अज्ञातवास यहीं हुआ था. तब भगवान श्री कृष्ण का यहां आगमन हुआ था. ऋषि दुर्वासा को यहीं शिष्यों के साथ कुंती ने सूर्य के दिये पात्र में भोजन बनाकर खिलाया था तथा श्राप देने से रोका था. इसके साथ ही मां मदालसा ने यहीं अपने पति को कुष्ठ रोग से मुक्ति दिलाई थी. दुर्गा सप्तशती की रचना यहीं ऋषि मार्कण्डेय ने की थी .  मगध में ककोलत की अपनी पहचान है.

17 मिनट के इस VIDEO को सुने लालू परिवार कैसे परेशान था TEJ PRATAP की तलाक की खबर सुनकर

17 मिनट के इस VIDEO को सुने लालू परिवार कैसे परेशान था TEJ PRATAP की तलाक की खबर सुनकर #LOKSHABHAELECTION2019 #JDU #NEERAJKUMAR #LALUYADAV

Bihari Mati यांनी वर पोस्ट केले शुक्रवार, १२ एप्रिल, २०१९

इस अवसर पर स्थानीय लोग स्नान के बाद ब्राह्मणों को सतुआ दान कर सतुआ व आम का टिकोला खाते हैं. आसपास के गांवों के साथ ही पूरे प्रखंड में किसी के घर चुूल्हा नहीं जलता तथा घर आए मेहमानों को भी सतुआ का भेाजन परोसा जाता है. वहीं यह भी मान्यता है कि इस दिन पितरों को सन्तुष्ट करने के लिए सत्तू, गुड़, चना, पंखा, मिट्टी का घड़ा, आम, फल आदि का दान पंडितों के बीच किए जाने की परम्परा है.

इसका वैज्ञानिक कारण यह है कि गर्मी के दिनों में सूर्य की तपिश से शरीर का पित्त कुपित हो जाता है. इससे निजात पाने के लिए आम के टिकोरे की चटनी सत्तू के साथ सेवन करने से धूप का असर कम होता है. इसी क्रम में लोग आम का पन्ना भी पीकर भी सूर्य की गरमी से होने वाले दुष्प्रभाव को दूर करते हैं.

Continue Reading

Article

रामनवमी पर विशेष- राम का चरित्र हम सबका आदर्श: आचार्य व्यंकटेश शर्मा

Published

on

भगवान राम का जन्म त्रेता युग के चैत शुक्ल नवमी यानि रामनवमी को हुआ. हमारे मन में यह प्रश्न उठ सकता है कि आखिर राम ही हम सबको इतने प्रिय क्यों हैं? हम लोगों का मानना है कि राम पतित पावन हैं, शोक नसावन हैं, भक्तों के रक्षक एवं उद्धारक हैं, लेकिन ये तो परमात्मा के हर अवतार के गुण हैं. इसमें राम की विशिष्टता कहा बनती है?
इन पंक्तियों से समझे—

प्रश्न नहीं है इस दुनिया में कौन कितना बड़ा है।
प्रश्न यही है किस जमीन पर कैसे कौन खड़ा है।।

राम अन्य देवी देवताओं की तरह नहीं हैं, वे मनुष्यों की भांति जीते हैं, दुख दर्द झेलते हैं, हंसते हैं, रोते हैं. साधारण व्यक्ति की तरह जीते हुए असाधारण बन जाते हैं यानी नर से नारायण. उन्होंने अपने आचरण में घोर विपत्तियों को सहते हुए पारिवारिक-सामाजिक उदात्त मूल्यों को जिया जो राम की विशिष्टता को रेखांकित करता है. कवि की पंक्तियां हैं—

त्याग दी सब ख्वाहिशें, निष्काम बनने के लिए
तीन पहरों तक तपा दिन, शाम बनने के लिए
घर नगर परिवार मां की ममता प्यार दुलार
राम ने खोया बहुत कुछ, राम बनने के लिए।

राम ने जिन आदर्शों को जीया, उन्हें तोड़ने वाले को जनसाधारण के मन ने कभी क्षमा नहीं किया चाहे वह कैकेयी हो या विभीषण. आज भी कोई अपने बेटे-बेटी का नाम साधारणत: कैकेयी या वि​भीषण नहीं रखता है. राम का नाम हमारे मन में रचा-बसा है तभी तो हम लोग मिलन-बिछोह में “राम-राम”, दुख-दर्द में “हाय राम”, डर या मौत का सामना करते हुए “हे राम” तथा मृत्युपरांत “राम नाम सत्य है” कहना हमारी आदत बन गयी है. इसलिए राम का चरित्र हम सबका आदर्श है. उनके जैसा उदात्त जीवन जीने का संकल्प आज भी मानवता के लिए पाथेय बना हुआ है. किसी कभी ने राम का वर्णन करते हुए लिखा है—

राम व्यक्ति को नहीं, व्यक्ति को प्राप्त हुई संज्ञा हैं
राम हमारा चिंतन, दर्शन, प्रीति, प्रकृति, प्रज्ञा हैं
राम चिरंतन जीवन मूल्यों का स्वर्णाभ शिखर हैं
राम हमारी संस्कृति का सारस्वत हस्ताक्षर हैं
राम हमारा कर्म, हमारा धर्म, हमारी गति हैं
राम हमारी शक्ति, हमारी भक्ति, हमारी मति हैं
बिना राम के आदर्शों का चरमोत्कर्ष कहां है,
बिना राम के इस भारत में भारतवर्ष कहां हैं!

आज के इस भौतिकवादी युग में भी राम की बहुत जरूरत है. वर्तमान में परिवार टूट रहे हैं. उससे पार पाने के लिए राम सबसे उपयुक्त है. राम ने स्वयं घर नहीं छोड़ा बल्कि घर के प्रति सदैव समर्पित रहे. उन्होंने घर परिवार में रहकर संबंधों में जीते हुए जीवन की उंचाइयों को प्राप्त किया. परिवार ही उनका वास्तविक कर्म क्षेत्र रहा. उनका शायद यह मानना रहा होगा कि इसे ठीक से जीओ तो जीवन उठता है, इसमें उपद्रव होता है तो जीवन मिटता है. इसलिए राम ने अपने आचरण से परिवार के हर संबंध को गौरव एवं गरिमा दी जो आज भी हमारे लिए अनुकरणीय है. आचार्य विष्णुकांत शास्त्री की पंक्तियां हैं—

बहुत कठिन है राम, जगत में राह तुम्हारी चलना।
कहना सुगम, निभाना दुर्गम, कैसी—कैसी छलना।।

पहले तो लोग संयुक्त परिवार में रहना चाहते थे, परिवार से अलग होने में दुखी होते थे. आज अलग के लिए भगवान से प्रार्थना करते है. इस कामना ने उनका दुख भी बढ़ा दिया है. तलाक बढ़ रहे हैं, तनाव बढ़ रहे हैं, पति-पत्नी में तकरार बढ़ रही है. ऐसे में इस कहावत को उलट कर चरितार्थ करने की आवश्यकता है, जाहि विधि राखे राम, ताही विधि रहिए के बजाय जाहि विधि रहे राम, ताहि विधि रहिए कि प्रेरणा से अपने जीवन को संवारना होगा.

जीवन में किसी लक्ष्य का न होना ही दरिद्रता है. परंतु केवल धन दौलत की प्रगति भी हमारी समृद्धि नहीं हो सकती. समृद्धि तो तभी कही जा सकती है जब हम इस प्रगति को अपनी शाश्वत परंपराओं से जोड़कर प्राप्त करें जो स्वयं राम ने किया. जीवन जीने के लिए केवल अर्थ और काम पर्याप्त नहीं है. अर्थ और काम व्यक्ति के जीवन को धर्मपूर्वक चलाये और राम तक पहुंचाएं तभी जीवन धन्य है

बुजुर्ग व्यक्ति ने Ashwini Kumar Chaubey को खरी खोटी सुना कर दिया पानी-पानी

बुजुर्ग व्यक्ति ने Ashwini Kumar Chaubey को खरी खोटी सुना कर दिया पानी-पानी #ashwini kumar chaubey https://youtu.be/mConvl8ETFo

Bihari Mati यांनी वर पोस्ट केले शनिवार, १३ एप्रिल, २०१९

आज की परिस्थितियों में भगवान राम के जीवन का यह प्रसंग भी बहुत प्रेरणादायक है. जब गुरु विश्वामित्र राम-लक्ष्मण को अपने यज्ञ की सुरक्षा हेतु ले जा रहे थे तो रास्ते में ताड़का की गर्जना सुनकर राम ने धनुष पर तीर चढ़ाया किंतु अपने सामने एक नारी को खड़े देखकर उन्होंने प्रत्यंचा ढीली कर ली. राम से ऐसा करने पर विश्व​मित्र ने जब पूछा तो उन्होंने कहा कि वह नारी है. इसपर गुरुवर ने समझाया कि वह नारी तो हैं किंतु उसके पीछे उसका छुपा राक्षसी चरित्र भी तो है इसलिए वह दंडनीय है, अन्यथा वह अभी हम सबको मार देगी. तब राम ने उसका वध किया.

वर्तमान परिप्रेक्ष्य में आतंकवाद एवं राष्ट्र विरोधी कार्यों में संलग्न मानव के छुपे चरित्र को ध्यान में रखते हुए राष्ट्र एवं संस्कृति की रक्षा के लिए हमें सजग रहना होगा. राम का आचरण एवं व्यवहार संबंधों में जीवन जीने की पराकाष्ठा है. इसलिए मनुष्य जबतक संबंधों में जीता रहेगा, हमारी संस्कृति के प्रतीक राम सदैव उसके लिए पाथेय बने रहेंगे और हम गर्व के साथ कह सकेंगे-क्या बता है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी।

लेखक
आचार्य व्यंकटेश शर्मा
काशी वेद वेदांग विद्यापीठ,वाराणसी 
प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य एवं समाजसेवी

Continue Reading
Advertisement
Advertisement
Politics5 days ago

30 साल के हुए तेज प्रताप यादव, बधाई देनेवालों का लगा तांता

Politics5 days ago

राजीव प्रताप रूडी ने किया सारण से नॉमिनेशन, हलफनामे में दिया अपनी संपत्ति का ब्यौरा

Politics5 days ago

लोकसभा चुनाव : छठे चरण के लिए आज से शुरू होगा नामांकन, दूसरा चरण का आज थम जायेगा प्रचार का शोर

Politics5 days ago

राहुल गांधी के खिलाफ मानहानि का केस करेंगे सुशील मोदी

Politics5 days ago

लालू को मिला प्रशांत किशोर के मिलने वाले मामले में नाराज साले साधु यादव कसा साथ

Sports5 days ago

MISSION WORLD CUP 2019 : टीम इंडिया की घोषणा, पंत की अनदेखी

Politics5 days ago

देश को बचाने के लिए कांग्रेस के हाथ को मजबूत करें : शत्रुघ्न

Politics5 days ago

लोकसभा चुनाव: कांग्रेस में बागी हुए शकील अहमद, मधुबनी से कल निर्दलीय करेंगे नामांकन

Politics5 days ago

योगी-मायावती के बाद मेनका और आजम पर चला EC का चाबुक, चुनाव प्रचार पर लगी रोग

Politics5 days ago

नोटबंदी और GST के नाम पर BJP वोट मांगकर दिखाएं: आलोक मेहता

Politics5 days ago

LOKSHABHA ELECTION का दूसरा चरण: बिहार की 5 सीटों पर 69 उम्मीदवारों की किस्मत दांव पर

Politics6 days ago

BJP में शामिल हुए महाचंद्र सिंह का बड़ा आरोप, कहा- महागठबंधन में जात-पात का शिकार हुआ

Politics6 days ago

लालू परिवार को लगा एक ओर झटका, TEJPRATAP को मायावती ने दिया झटका, जानिए पूरी खबर

Politics6 days ago

अश्वनी चौबे पर TEJASHWI ने साधी चुप्पी, CM और KC त्यागी पर भड़के

Politics6 days ago

बोले सुशील मोदी, व्यापारियों-किसानों को पेंशन देगी MODI सरकार

Politics2 weeks ago

अनंत सिंह की चुनौतियों को नामांकन से पहले ललन सिंह कुछ इस तरह देने जा रहे जवाब

Videos2 weeks ago

VIDEO: बाहुबली विधायक अनंत सिंह के प्रतिद्वंद्वी को मुंगेर की जनता से ज्यादा उम्मीद

Politics2 weeks ago

बाहुबली विधायक के नीतीश पर लगाए आरोपों को लेकर तेजस्वी ने बड़ी साजिश की जताई आशंका

Politics2 weeks ago

नाराज ANANT SINGH ने प्रेस कांफ्रेंस कर LALAN SINGH और CM NITISH के खोले गंभीर राज

BIHARI Charcha2 weeks ago

समाज के संवेदनशील मुद्दों पर लोगों की जागरूकता में लोक कलाकारों की महत्वपूर्ण भूमिका: भरत सिंह भारती

Videos3 weeks ago

तेजप्रताप यादव से मिलने पहुंची अर्शी खान, कहा – “MY BEST FREIND”

Videos4 weeks ago

VIDEO: जानें, पप्पू यादव को तेजस्वी ने क्या दे डाली राजनीति को लेकर नसीहत

Bhojpuri4 weeks ago

VIDEO: भोजपुरी फिल्म ‘रब तुझमें दिखता है’ का भव्‍य मुहूर्त पटना में संपन्न

Sports2 months ago

VIDEO-INDvsAUS : विदर्भ में ऑस्‍ट्रेलिया के खिलाफ भारत ने लगाया जीत का चौका

Politics2 months ago

VIDEO: अपने ही कार्यक्रम में नहीं दिखे तेजस्वी यादव , वजह बनी तबियत खराब

Videos2 months ago

नीतीश कुमार के जनहित कार्यों में सिपाही की तरह करूंगा काम: नरेंद्र सिंह

Politics2 months ago

VIDEO-लोकसभा चुनाव: तेजस्वी महागठबंधन के घटक दलों को साथ लेकर चलने में असमर्थ

Politics2 months ago

VIDEO: जात-पात नहीं विकास की बात पर राजनीति होनी चाहिए: गजपा

Videos2 months ago

अब जल्द ही बदल जाएगा लालू परिवार का एड्रेस

Videos2 months ago

राजभवन घेराव करने जा रहे किसानों का डाक बंगला चौराहे पर पुलिस कर्मियों से झड़प

Advertisement

Trending

Copyright © 2018 Biharimati Powered by Leadpanther.