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तेजप्रताप को हिंदू विवाह अधिनियम के तहत इतनी जल्दी नहीं मिल सकता तलाक, यह है कानूनी पेंच

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लालू प्रसाद यादव के सुपुत्र तेज प्रताप और चंद्रिका राय की सुपुत्री और पूर्व मुख्यमंत्री दारोगा राय की प्रपौत्री ऐश्वर्या की शादी एक साल के अंदर ही टूटने की कगार पर पहुंच गई. आज मीडिया में यह खबरें सुर्खियों में है. लोग इस संबंध के टूट के कगार पर पहुंचने पर चिंतित हैं और न केवल पूरे बिहार बल्कि पूरे देश की निगाह इस मामले में चल रही गतिविधियों पर टिकी हुई हैं. जैसा कि आपको खबर मिल चुकी है कि विवाह संबंध विच्छेद करने का मामला आगे बढ़ चुका है.

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तेज प्रताप यादव की ओर से उनके वकील यशवंत कुमार शर्मा ने अदालत में तलाक की याचिका डाली है. कोर्ट ने भी इस मामले की सुनवाई को लेकर 29 नवंबर की तिथि दे दी है. वहीं परिवार के वरिष्ठ लोग भी इस मामले में सुलह की कोशिशों में लग गए हैं. ऐसे में आइए जानते हैं कि क्या उनकी तलाक की अर्जी पर कोर्ट सुनवाई कर सकती है? क्या है इसका कानूनी पक्ष?

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हिंदू विवाह अधिनियम के परिवार अदालत में मामले धारा 12 के अंतर्गत संबंध विच्छेद संबंधी याचिका केवल विवाह के एक साल बाद ही प्रक्रिया में आता है. लेकिन धारा 14 के अंतर्गत कोर्ट को विशेष परिस्थिति में यह अधिकार है कि वह इस पर सुनवाई की प्रक्रिया को आगे बढ़ाए.  याचिकाकर्ता को इस संबंध में अदालत को इसकी वजह बतानी होती है. अदालत जब इससे संतुष्ट हो तो इस पर विचार किया जा सकता है. शादी के एक साल पूर्ण न होने की स्थिति में संबंध विच्छेद की याचिका डालने पर कोर्ट इस विचार योग्य न मानकर खारिज कर सकता है या फिर एक साल की अवधि पूरा होने तक उसे लंबित रख सकता है.

भारत में तलाक दो कानूनों के तहत हो सकते हैं. पहला है हिन्दू मैरिज एक्ट, 1955 और स्पेशल मैरिज एक्ट, 1954. तलाक लेने की प्रक्रिया दो आधार पर आगे बढती है. पहला आधार है–सहमती से तलाक. दूसरा आधार–पति-पत्नी में से किसी भी एक का शादी से खुश न होना. देश में सहमती से तलाक लेने की प्रक्रिया दूसरे मामले के मुकाबले आसान है. हालांकि इसमें भी कम से कम छह महीने का वक़्त लगता ही है.
तलाक का जो दूसरा आधार है, वह है – पति-पत्नी में अनबन का हद पार कर जाना. बता दें कि इस प्रक्रिया से भारत में तलाक के लिए तभी लड़ सकते हैं जब आप किसी तरह से शारीरिक/मानसिक प्रताड़ना, पार्टनर द्वारा छोड़ देना, पार्टनर की विक्षिप्त मानसिक स्थिति, धोखा, नपुसंकता जैसी गंभीर वजहों को ‘साबित’ कर देते हैं, जिससे साथ रहना नामुमकिन हो जाए. तलाक तभी मंजूर होगा अगर पीड़ित पक्ष साबित कर सके कि वो वाकई तलाक का हकदार है.

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अगर पत्नी या पति आपसी तलाक के लिए तैयार नहीं है, तो इस आधार पर हिन्दू मैरिज एक्ट, 1955 के सेक्शन 13(1) के तहत याचिका दायर कर सकते हैं. इस तरह से तलाक लेने की प्रक्रिया में सबसे अहम यही होता है कि पीड़ित पक्ष कितने मजबूत सुबूत दिखा पाता है. जानकारी रखें कि सिर्फ आपसी रिश्ते खराब होने के आधार पर तलाक के नियम भारत में नहीं हैं. इसे आपसी सहमति से साबित करके लेना होता है. इस प्रक्रिया में भी छह महीने से साल भर का समय लग ही जाता है. इन बातों से साफ है कि तेजप्रताप को अभी तलाक की प्रक्रिया पूरा करने के लिए काफी लंबा और मजबूत संघर्ष करना होगा.

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नहाय-खाय के साथ चार दिवसीय महापर्व चैती छठ शुरू, खरना पूजा कल

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चार दिवसीय महापर्व चैती छठ का अनुष्ठान आज नहाय-खाय के साथ शुरू हो गया है. आज सुबह व्रतियों ने गंगा नदी में स्नान किया और गंगाजल भरकर घर ले गईं. गंगाजल से व्रतियों ने नहाय खाय का प्रसाद कद्दू भात बनाया और भगवान को नमन कर प्रसाद को ग्रहण किया. उसके बाद परिवार के बाकी लोगों ने भी प्रसाद ग्रहण किया. कल छठव्रती खरना की पूजा करेंगी, गुरूवार को व्रती भगवान भास्कर को पहला अर्घ्य देंगी. फिर शुक्रवार को उदयीमान भगवान सूर्य को अर्घ्य के साथ महापर्व संपन्न हो जाएगा.

सूर्य की उपासना का पर्व छठ हिन्दू नववर्ष के पहले माह चैत्र के शुक्ल पक्ष की षष्ठी को मनाया जाता है. इस पर्व में व्रती सूर्य भगवान की पूजा कर उनसे आरोग्यता, संतान और मनोकामनाओं की पूर्ति का आर्शीवाद मांगते हैं.आज नहाय-खा के साथ इस महापर्व की शुरुआत हो गई है. भगवान भास्कर को सायंकालीन अर्घ्य 11 अप्रैल और 12 अप्रैल को उदीयमान सूर्य को अर्घ्य के साथ अनुष्ठान संपन्न होगा.

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आज नहाय-खाए में व्रती लौकी की सब्जी और अरवा चावल का प्रसाद ग्रहण करेंगे. छठ में इसका खास महत्व है. वैदिक मान्यता है कि इससे पुत्र की प्राप्ति होती है तो वैज्ञानिक मान्यता है कि गर्भाशय मजबूत होता है. बुधवार को खरना में कद्दू की सब्जी और चने दाल खाने की परंपरा है.

शिवहर सीट को लेकर राजद कार्यकर्ताओं ने जमकर काटा बवाल

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Bihari Mati यांनी वर पोस्ट केले सोमवार, ८ एप्रिल, २०१९

वैज्ञानिक दृष्टि से देखें तो कद्दू में लगभग 96 फीसदी पानी होता है. इसे ग्रहण करने से कई तरह की बीमारियां खत्म होती हैं. वहीं चने की दाल बाकी दालों में सबसे अधिक शुद्ध है. खरने के प्रसाद में ईख का कच्चा रस, गुड़ के सेवन से त्वचा रोग, आंख की पीड़ा, शरीर के दाग-धब्बे समाप्त हो जाते हैं.षष्ठी को पूरी तरह निराहार व निर्जला रहा जाता है. दरअसल वसंत और शरद ऋतु संक्रमण का काल माना जाता है.

इसमें बीमारी का प्रकोप ज्यादा होता है. इसलिए बीमारी के प्रकोप से बचाव के लिए आराधना व उपासना पर जोर दिया गया है.चैती छठ कार्तिक छठ की तरह ही होता है, मगर यह छोटे पैमाने पर मनाया जाता है. इसमें डाला पर ठेकुआ के साथ ही फल और मेवों का प्रसाद चढ़ाया जाता है. यह मूल रूप से पूर्वी भारत में मनाया जाता है, मगर दिल्ली, मुंबई जैसे भारत के अन्य शहरों में भी इसकी खासी रोनक देखने को मिलती है.

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chaitra navratri: जानें कलश स्थापना और मां शैलपुत्री की पूजा का शुभ मुहूर्त

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आज चैत्र नवरात्र का पहला दिन है. चैत्र नवरात्र का आरम्भ होने से प्रतिपदा के दिन कलश स्थापना के साथ ही मां दुर्गा की पूजा शुरू की जाती है. पहले दिन मां दुर्गा के पहले स्वरूप शैलपुत्री की पूजा होती है. शैलपुत्री मतलब पहाड़, पत्थर मतलब स्थिरता और पवित्रता. जीवन में स्थिरता तभी आती है, जब वह संपूर्ण होता है यानी स्वस्थ, सुखी और खशुहाल.

चैत्र नवरात्र को वसंत या वासंतिक नवरात्रि भी कहा जाता है. ज्योतिषाचार्यों के अनुसार इस बार चैत्र नवरात्रि 8 दिनों की होगी, इस दौरान मां के नौ रूपों की पूजा होगी. जिनमें मां शैलपुत्री की पूजा सबसे पहले दिन होगी. बता दें चैत्र नवरात्रि से हिंदू नववर्ष का आरंभ भी माना जाता है.

ऐसे करें कलस स्थापना
नवरात्र के पहले दिन घर की सफाई करें और जिस जगह पर माता की प्रतिमा स्थापित करना है वहां की सफाई कर चौकी स्थापित करें. इसके बाद मां दुर्गा के नाम की ज्योत जलाएं. एक कलश लें और उसमें मिट्टी डालें, फिर इसमें जौ के बीज छिड़क दें. एक अलग कलश लें और उस पर मौली बाधें और उस पर स्वास्तिक बनाएं. लोटे के ऊपर आमृपत्र रखें और उसमें एक नारियल रखकर चुनरी लपेट दें. अब कलश को जौ वाले मिट्टी के पात्र के बीचों-बीच रख दें और इसी के सामने ज्योत स्थापित कर दें.कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त सुबह 06:19 से 10:26 बजे तक है.

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माँ की पूजन विधि-
सबसे पहले चौकी पर माता शैलपुत्री की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें. इसके बाद गंगा जल से शुद्धिकरण करें. माता की चौकी स्थापित करें और उसी चौकी पर माता की प्रतिमा स्थापित करें. इसके बाद व्रत, पूजन का संकल्प लें और वैदिक एवं सप्तशती मंत्रों द्वारा मां शैलपुत्री सहित समस्त स्थापित देवताओं की पूजा करें. माता का आह्वान करें और माता को वस्त्र, सौभाग्य सूत्र, चंदन, रोली, हल्दी, सिंदूर, दुर्वा, बिल्वपत्र, आभूषण, पुष्प-हार, सुगंधित द्रव्य, धूप-दीप, फल, पान, अर्पित करें. इसके बाद आरती कर पूजन संपन्न करें.

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विक्रम संवत 2076 :नव संवत्सर का राजा होगा शनि, मंत्री सूर्य

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चैत्र शुक्ल प्रतिपदा 6 अप्रैल शनिवार से नव संवत्सर विक्रम संवत 2076 और शालिवाहन शक संवत 1941 प्रारंभ हो रहा है. काशी वेद वेदांग विद्यापीठ के आचार्य वेंकटेश कुमार शर्मा के अनुसार चैत्रीय चंद्रवर्षारंभ में रूद्रविंशति के अंतर्गत परिधावी नामक संवत्सर प्रारंभ होगा. नव संवत्सर का राजा शनि और मंत्री सूर्य होगा. राजा शनि होने के कारण यह वर्ष भारी उठापटक वाला रहेगा.

शनि न्यायाधिपति भी हैं इसलिए इस साल केवल वे ही लोग मौज में रहेंगे जो सत्य के मार्ग पर चलेंगे, दूसरों का अहित नहीं करेंगे और सदैव न्याय प्रिय बातें और सद्व्यवहार करेंगे. बुरे कर्म, किसी के साथ धोखा, स्त्रियों का अपमान, अत्याचार, चोरी और पापकर्म करने वाले लोगों को इस साल शनिदेव बिलकुल भी नहीं बख्शेंगे.

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राजा शनि का फल नव संवत्सर का राजा शनि है इसलिए प्रजा को कई तरह के कष्टों से गुजरना होगा. परेशानी उन्हें ही होगी जो न्याय का मार्ग छोड़ेंगे. कुछ क्षेत्रों में भारी वर्षा तो कहीं अल्पवृष्टि के कारण फसलों और जनजीवन को नुकसान पहुंचेगा. अन्न उत्पादन प्रभावित होगा. महंगाई में वृद्धि होगी. संक्रामक रोग बढ़ेंगे. राजनीतिक मामलों में देश आंतरिक मोर्चों पर जूझता रहेगा लेकिन विश्व मंच पर भारत की प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी.

यह रहेगी नए संवत की पूरी परिषद

राजा शनि – राष्ट्रपति, राष्ट्राध्यक्ष
मंत्री सूर्य – प्रधानमंत्री, शासनाध्यक्ष
सस्येश मंगल – वर्षा ऋतु की फसलों का स्वामी
धान्येश चंद्र – शरद ऋतु की फसलों का स्वामी
मेघेश शनि – बादलों का स्वामी, बारिश पर आधिपत्य
रसेश गुरु – रसभरे पदार्थों का स्वामी
नीरसेश मंगल – धातुओं, वस्त्रों का स्वामी
फलेश शनि – समग्र फलों का स्वामी
धनेश मंगल – धन एवं कोष का स्वामी
दुर्गेश शनि – रक्षा मंत्री, सेनानायक

10 में से 8 पद पाप ग्रहों को

इस वर्ष परिषद के 10 अधिकारियों में से आठ पर पापग्रहों का अधिकार है. जिनमें शनि के अधीन चार, मंगल के अधीन तीन और सूर्य के अधीन एक पद है. ऐसी स्थिति कम ही बनती है इसलिए यह वर्ष अग्निपरीक्षा वाला वर्ष रहेगा. खासकर पड़ोसी राज्यों से मतभेद खुलकर सामने आएंगे. युद्ध जैसे हालात बनेंगे.

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