शुक्र प्रदोष व्रत 2018: चमका सकता है आपकी किस्मत, जानिए किस शुभ मुहूर्त में कैसे करें पूजा

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प्रदोष व्रत के दिन भगवान शिव-पार्वती की पूजा-अर्चना की जाती है. हर माह के कृष्ण और शुक्ल, दोनों पक्षों की त्रयोदशी को प्रदोष व्रत किया जाता है और अगर त्रयोदशी तिथि पूरा एक दिन पार करके अगले दिन भी हो तो प्रदोष व्रत उस दिन किया जाता है, जिस दिन प्रदोष काल होता है. प्रदोष काल रात्रि के प्रथम प्रहर यानि सूर्यास्त के तुरंत बाद के समय को कहते हैं. जानिए पूजा का सही समय और पूजा विधि.

शुक्रवार को पड़ने वाली प्रदोष व्रत अच्छा भाग्य और दंपत्ति की खुशियों को बनाए रखने के लिए होता है.
शुभ मुहूर्त
पूजा करने का शुभ समय: शाम 6:41 से 8:57 मिनट तक
प्रदोष व्रत का पूजन करने के लिए सूर्यास्त के पश्चात् प्रदोष काल का समय सबसे उपयुक्त माना जाता है. इसलिए यह पूजन इसी समय करना चाहिए.


प्रदोष व्रत की पूजा विधि
ब्रह्ममुहूर्त में उठ कर सभी कामों से निवृत्त होकर भगवान शिव का स्मरण करें. इसके साथ ही इस व्रत का संकल्प करें. इस दिन भूल कर भी कोई आहार न लें. शाम को सूर्यास्त होने के एक घंटें पहले स्नान करके सफेद कपड़े पहने.
इसके बाद ईशान कोण में किसी एकांत जगह पूजा करने की जगह बनाएं. इसके लिए सबसे पहले गंगाजल से उस जगह को शुद्ध करें फिर इसे गाय के गोबर से लिपे. इसके बाद पद्म पुष्प की आकृति को पांच रंगों से मिलाकर चौक को तैयार करें. इसके बाद आप कुश के आसन में उत्तर-पूर्व की दिशा में बैठकर भगवान शिव की पूजा करें. भगवान शिव का जलाभिषेक करें साथ में ऊं नम: शिवाय: का जाप भी करते रहें. इसके बाद विधि-विधान के साथ शिव की पूजा करें फिर इस कथा को सुन कर आरती करें और प्रसाद सभी को बांटे.

(काशी वेद वेदांग कार्यालय में संपर्क हेतु डायल करें: 01204593661, 06391913131)

 

Lord Shiva-Parvati is worshiped on the day of Pradosha fast. Pradosha is practiced every month for the Krishna and Shukla of Triadshi, and if the date of Triad is completed one day after completing one day, then the Pradosha fast is performed on that day, on the day the Pradosha period occurs.

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