बीजेपी सांसद आरके सिन्हा ने लौटाये अपने वेतन और भत्ते

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भाजपा के राज्यसभा सदस्य आरके सिन्हा ने पार्टी के अन्य सांसदों की तरह बजट सत्र का वेतन और भत्ता सरकारी खजाने में लौटा दिया है. सिन्हा ने कहा कि जिस प्रकार बजट सत्र में कांग्रेस, सपा, बसपा, राजद और वामपंथी पार्टियों ने राज्यसभा को चलने नहीं दिया वह शर्मनाक है. किसी भी जनप्रतिनिधि को यह अधिकार नहीं बनता कि वे लोकतंत्र का इस तरह मखौल उड़ाएं और सदन की कार्यवाही को न चलने दें.
सांसद सिन्हा ने कहा कि पूरे सत्र को पंजाब नेशनल बैंक और नीरव मोदी के घोटाले को लेकर बाधित किया गया, जबकि सभापति ने इस विषय पर अल्पकालीन बहस की नोटिस को स्वीकृति दे दी थी और सरकार भी बहस शुरू कराने के लिए और बहस के बाद उत्तर देने के लिए तैयार हो गयी थी. विपक्ष का मकसद तो बहस कराना नहीं, बल्कि सिर्फ सदन को बाधित करना था.
बिहार के बक्सर जिले में एक लोअर मिडिल क्लास फैमिली में जन्में सिन्हा पं. दीनदयाल उपाध्याय से के जनसंघ में काम करते हुए बीजेपी से जुड़ गए. 2014 से पहले भी सिन्हा ने राज्यसभा की मेंबरशिप के लिए कोशिश की थी, लेकिन कास्ट फैक्टर आड़े आ गया. सिन्हा 1999 से 2004 तक मानव संसाधान विकास मंत्रालय के सलाहकार के तौर पर काम कर चुके हैं. इन्होंने बीजेपी के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन गडकरी के साथ भी काफी काम किया है. दिल्ली विधानसभा चुनाव में भी सक्रिय रहे। दिल्ली और बिहार में पार्टी के चुनाव अभियानों को यही स्पॉन्सर करते हैं. पटना में पीएम मोदी की हुंकार रैली की सारी व्यवस्थाएं सिन्हा ने ही संभाली थी. गांव के युवाओं के लिए रोजगार पैदा करने में भी ये सरकार की मदद करते हैं.

 

 

BJP’s Rajya Sabha member RK Sinha has returned the salary and allowance of the budget session to the official treasury like other MPs of the party. Sinha said that the way in which Congress, SP, BSP, RJD and Left parties did not let the Rajya Sabha run in the budget session is shameful. No public representative has the right to ridicule democracy like this and not let the proceedings of the House continue.

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