अब बिहार के इस दलित नेता ने की ‘हरिजिस्तान’ की मांग

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एससी और एसटी कानून को लेकर हो रही चर्चा के बीच जदयू (शरद गुट) के प्रदेश अध्यक्ष और पूर्व मंत्री रमई राम का बड़ा बयान सामने आया है. रमई राम ने कहा है कि देश में यदि संविधान के तहत अनुसूचित जाति और जनजाति समुदाय के लोगों को मिले अधिकारों को नहीं दिया गया तो देश के भीतर हरिजिस्तान की मांग फिर से उठ सकती है. साथ ही उन्होंने भारत बंद के दौरान मरे लोगों को शहीद का दर्जा दिए जाने की मांग उठाई.

रमई राम ने बाबा साहेब भीमराव अम्बेडकर द्वारा आजादी के समय पाकिस्तान के बाद हरिजिस्तान की मांग उठाने की मांग का जिक्र करते हुए कहा कि 70 साल में समाज में भाईचारा और सौहार्द सरकार ने कायम रखा, लेकिन फिर से समाज के कमजोर अनुसूचित जाति और जनजाति के अधिकारों में कटौती की जा रही है. साथ ही इन वर्गों के सुरक्षा और विकास की बात को भी पीछे रखा जा रहा है.

मजफ्फरपुर में अपने आवास पर आयोजित प्रेस वार्ता में रमई राम ने केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान पर हमला करते हुए कहा कि दलित समाज के हित की बजाय अपने परिवार के लिए वे मोदी के साथ मिलकर राजनीति में हैं. सोमवार के बंद को एतिहासिक बताते हुए रमई राम ने कहा कि केन्द्र और राज्य सरकार न्यायालय की आड़ में एससी और एसटी को मिलने वाली संवैधानिक सुविधाओं से वंचित कर रही है.

 

 

 

Between the SC and the ST law, a big statement came out between JD (U) and the State Minister and former minister Ramai Ram. Ramai Ram has said that in the country if rights are not given to people belonging to Scheduled Castes and Scheduled Tribes under the Constitution, then the demand of Haristan in the country can rise again. At the same time, they raised the demand of martyred status for the dead people during the bandh.

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