नियोजित शिक्षकों के पक्ष में आज सुप्रीम कोर्ट दे सकता है फैसला

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आज सुप्रीम कोर्ट से नियोजित शिक्षकों को राहत मिल सकती है. इस मामले में सरकार की ओर से नया प्रस्ताव रखा जाएगा. सूबे के साढ़े तीन लाख नियोजित शिक्षकों की नजर सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर टिकी है. सरकार की ओर से शिक्षकों के वेतन में 25 से 30 प्रतिशत बढ़ोतरी का प्रस्ताव तैयार किया गया है. सरकार इस नये प्रस्ताव के साथ सुप्रीम कोर्ट में अपना पक्ष रखेगी. 15 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को पूछा था कि शिक्षकों को चपरासी से कम सैलरी क्यों दी जा रही है.

सुप्रीम कोर्ट के फटकार के बाद बिहार सरकार ने नया प्रस्ताव तैयार किया है. जिसके तहत सरकार कोर्ट को बताएगी कि रेगुलर शिक्षकों के बराबर नियोजित शिक्षकों को वेतन देने में सरकार सक्षम नहीं है. नए प्रस्ताव में इस बात का भी जिक्र है कि सरकार नियोजित शिक्षकों की सैलरी को 25 से 30 प्रतिशत बढ़ाने के लिए तैयार है.

बता दें कि राज्य साढे तीन लाख नियोजित शिक्षकों को हाई कोर्ट ने समान काम के लिए समान वेतन देने का आदेश दिया था. जिसे राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में चैलेंज किया. इसी मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में चल रही है. 15 मार्च को हुई सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने बिहार सरकार की ओर से नियोजित शिक्षकों को मानदेय में 20 फीसदी की बढ़ोतरी पर नाराजगी जताते हुए कहा कि छात्रों का भविष्य बनानेवाले शिक्षकों का वेतन चपरासी के वेतन से भी कम क्यों है.

वहीं, अदालत ने बिहार सरकार को राहत देते हुए 27 मार्च तक दोनों पक्षों को आपस में सहमति बनाने का मौका दिया था. साथ ही मामले की सुनवाई के लिए अगली तारीख 27 मार्च तय कर दी थी. बिहार सरकार ने 15 मार्च को सुप्रीम कोर्ट को बताया कि बिहार सरकार नियोजित शिक्षकों को समान कार्य के बदले समान वेतन व अन्य लाभ देने पर 50 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा का खर्च आयेगा. इतनी बड़ी रकम का प्रबंध करने में असमर्थता जतायी थी.

सरकार ने बताया कि नियोजित शिक्षकों को मानेदय में 20 फीसदी की बढ़ोतरी किये जाने से ही करीब 2088 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ सरकार पर आयेगा. सुप्रीम कोर्ट ने नियोजित शिक्षकों के समान कार्य के बदले समान वेतन मामले पर 29 जनवरी को पहली सुनवाई की थी. सुप्रीम कोर्ट में बिहार सरकार ने अपनी रिपोर्ट दाखिल करते हुए कहा था कि नियोजित शिक्षकों के वेतन में पे-मेट्रिक्स लागू कर मानदेय में 20 फीसदी की वृद्धि की जायेगी.

इसके लिए शिक्षकों को एक परीक्षा पास करनी होगी. यह परीक्षा वर्ष में दो बार आयोजित की जायेगी. साथ ही बिहार सरकार ने शर्त रखी कि यदि शिक्षक परीक्षा को पास नहीं कर पाते हैं, तो उन्हें लाभ से वंचित कर दिया जायेगा.सरकार को निर्देश दिये थे कि वह नियोजित शिक्षकों को समान काम के बदले समान सुविधा प्रदान करे.

 

 

 

 

Today, contract teachers can get relief by the Supreme Court . In this case a new proposal will be made by the government. The eyes of the three lakh employed teachers in the province are fixed on the verdict of the Supreme Court. A proposal for 25 to 30 percent increase in salary of teachers has been prepared by the government. The government will keep its stand in the Supreme Court with this new proposal.

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