नवरात्र की अष्टमी और नवमी आज, घर-घर पूजी जाएंगी कन्या, जानिए कन्या पूजन का शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

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नवरात्र के आखिरी दिन यानि नौवें दिन कन्या पूजन और उन्हें घर बुलाकर भोजन कराने का विधान होता है. दुर्गाष्टमी और नवमी के दिन कन्याओ को नौ देवी स्वरुप मानकर इनका स्वागत किया जाता है. माना जाता है की इन कन्याओ को देवियों की तरह आदर सत्कार और भोज से मां दुर्गा प्रसन्न हो जाती है और अपने भक्तो को सुख समृद्धि का वरदान दे जाती है.
नवरात्रि के दौरान कन्या पूजन का बडा महत्व है. नौ कन्याओं को नौ देवियों के प्रतिविंब के रूप में पूजने के बाद ही भक्त का नवरात्र व्रत पूरा होता है. अपने सामर्थ्य के अनुसार उन्हें भोग लगाकर दक्षिणा देने मात्र से ही मां दुर्गा प्रसन्न हो जाती हैं और भक्तों को उनका मनचाहा वरदान देती हैं.
नवरात्रि के किस दिन करें कन्या पूजन: कुछ लोग नवमी के दिन भी कन्या पूजन और भोज रखते हैं और कुछ लोग अष्टमी के दिन.लेकिन अष्टमी के दिन कन्या पूजन श्रेष्ठ रहता है.
शुभ मुहूर्त: चैत्र शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि सुबह 08:03 तक ही रहेगी, उसके बाद नवमी तिथि लग जायेगी और नवमी तिथि अगले सूर्योदय के पहले ही 05:54 पर खत्म हो जायेगी. अतः 26 तारीख का सूर्योदय दशमी तिथि में होगा.
कन्या पूजन विधि: जिन कन्याओ को भोज पर खाने के लिए बुलाना है , उन्हें एक दिन पहले ही न्योता दे दे. गृह प्रवेश पर कन्याओं का पुरे परिवार के सदस्य वर्षा से स्वागत करें और नव दुर्गा के सभी नौ नामों के जयकारे लगाए. अब इन कन्याओं को आरामदायक और स्वच्छ जगह बिठाकर इन सभी के पैरो को बारी बारी दूध से भरे थाल या थाली में रखकर अपने हाथो से उनके पैर धोने चाहिए और पैर छुकर आशीष लेना चाहिए.
कन्याओं की उम्र: कन्याओं की आयु 2 साल से ऊपर तथा 10 साल तक होनी चाहिए और इनकी संख्या कम से कम 9 तो होनी ही चाहिए. अगर 9 से ज्यादा कन्या भोज पर आ रही है तो कोई समस्या नहीं है.

 

 

On the last day of Navaratri i.e., on the ninth day, there is the law of offering girl food and calling her home. On the day of Durgashtami and Navami, the daughters are welcomed to accept the form of nine Goddesses. It is believed that these daughters are blessed with respect and festivals like Goddess Durga and bless their devotees with happiness and prosperity.

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