आपको बताएँगे संस्कृत के आदि पुरुष पाणिनी के बारे में

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कुलुष दुनिया के बेहद शुरुआती कम्प्यूटरों में से एक. जब दुनिया में डिजिटल क्रांति की शुरुआत हो रही थी. डिजिटल क्रांति आज भारत के हर कोनें में पहुंच चुकी है. कुलुष जो भारतीय सॉफ्टवेयर इंजीनियरों की सफलता थी. उसमें और 2500 हजार साल पहले जन्में एक व्यक्ति के विचारों में क्या समानता हो सकती है ? उस व्यक्ति का नाम था पाणिनी. उन्होंने 40 पन्नों की जिस अष्टाध्यायी की रचना की वो इतिहास में सबसे अधिक पूर्ण भाषायी तंत्र है. जिससे संस्कृत को हजारों साल पहले एशिया के अलग-अलग हिस्सों में फलने फूलने में मदद मिली.

1. ब्राह्मण परिवार से आने वाले पाणिनी के बारे में माना जाता है कि उनका भारतीय उपमहाद्वीप के उत्तर पश्चिम इलाके में ईसा पूर्व चौथी सदी के आस पास हुआ था. ये जगह अफगानिस्तान की सीमा के पास पेशावर के नजदीक है.

2. उनके गांव गांधार में ही काबुल नदी सिंधु में मिली है उस संगम से कुछ मील दूर यह गाँव बसा था. जिसे अब लहुर के नाम से जाना जाता हैं.

3. अपने जन्मस्थान के नाम पर ही इन्हें पाणिनि शालातुरीय भी कहा गया है और अष्टाध्यायी में स्वयं उन्होंने इस नाम का लिया है.

4. चीनी यात्री युवान्च्वाङ् (7वीं सदी) उत्तर-पश्चिम से आते समय शालातुर गाँव में गए थे. पाणिनि के गुरु का नाम उपवर्ष, पिता का नाम पणिन और माता का नाम दाक्षी था.

5. पाणिनि जब बड़े हुए तो उन्होंने व्याकरण शास्त्र का गहरा अध्ययन किया. उनसे पहले शब्दविद्या के कई लोग आचार्य हो चुके थे.

6. उनके ग्रंथों को पढ़कर और उनके भेदों को अच्छे से देखकर पाणिनि के मन में वह विचार आया कि उन्हें व्याकरण शास्त्र पर और अच्छे से अध्ययन करना चाहिए.

7. पाणिनी का सारा काम संस्कृत में ही है. संस्कृत को देवों की भाषा भी कहा जाता है. पाणिनी ने ऐसे संकेत विकसित किये जिससे उन्होंने संस्कृत व्याकरण के सिद्धांतों और रचना को व्यक्त किया. जिसमें क्रिया के प्रकारों और संक्षिप्त रूपों का इस्तेमाल किया गया.

8. पाणिनी ने लगभग 4 हजार सूत्र बनाये, जिनका उच्चारण ढाई घंटे में किया जा सकता है. लेकिन जब हाल ही में अंग्रेजी में उन्हें अनुवादित किया गया तो उसे लिखने के लिए एक हजार तीन सौ से ज्यादा पन्ने लगे.

9. पाणिनी ने एक ऐसा तंत्र भी विकसित किया जिसमें गणित के सवालों को हल करने के नियमों की प्रणाली थी. जिसे आज हम कम्प्यूटर कहते हैं.

10. पाणिनी ने अष्टाध्यायी की रचना की. अष्टाध्यायी सिर्फ एक व्याकरण ग्रंथ नहीं है बल्कि इसमें तत्कालीन भारतीय समाज का पूरा चित्र देखने को मिलता है. उस समय के भूगोल, सामाजिक, आर्थिक, शिक्षा और राजनीतिक जीवन, दार्शनिक चिंतन, ख़ान-पान, रहन-सहन इन सबके प्रसंग जगह-जगह पर लिखे हैं.

11. पाणिनी के समय में संस्कृत पर ब्राह्मणों का एकाधिकार था, और ये भाषा भारत के उत्तर भारत तक ही सीमित थी. बाद में ये भाषा साहित्य की भाषा हो गई और ये एशिया तक फैल गई.

12. पाणिनी की – पैड आने से भारतीय भाषाओं में आदान-प्रदान शुरू हुआ. इनमें उन्हीं पुराने सिद्धांतों को अपनाया गया और ये 9 प्रमुख भारतीय भाषाओं में उपलब्ध हैं.जिनमें हिंदी, बंगाली, कन्नड प्रमुख है.

13. संस्कृत की वजह से ही आज कम्प्यूटर प्रोग्रामिंग मजबूत हुई है. इसका श्रेय सिर्फ पाणिनी को ही जाता है.

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