क्‍या आप जानते है, द्रौपदी का असली प्रेम कौन था

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आपको बता दें कि द्रौपदी महाभारत के सबसे प्रसिद्ध पात्रों में से एक है। द्रौपदी पांचाल देश के राजा द्रुपद की पुत्री है, द्रौपदी का जन्म यज्ञकुण्ड से हुआ था, कहां जाता है कि द्रौपदी पूर्वजन्म में किसी ऋषि की कन्या थी। द्रौपदी एक कन्या थी जो पांचों पाण्डवों की पत्नी बनी। लेकिन क्या आप जानते हैं कि पांच पतियों से विवाह करने वाली द्रौपदी को अपने पतियों से नहीं, बल्कि कर्ण से प्रेम था।

लेकिन कहां जाता है कि‍ सम्मान के कारण द्रौपदी और कर्ण कभी एक-दूसरे से अपने मन की बात नहीं कह पाए. द्रौपदी की सुंदरता, बुद्धि और विवेक को देखकर कई राजा मोहित थे. लेकिन जब द्रौपदी अपनी सखियों के साथ भ्रमण करने के लिए गई थी. ओर वहां देखते ही कर्ण को उनसे प्रेम हो गया है। जब राजा द्रुपद ने द्रौपदी को महान योद्धाओं के चित्र भिजवाए थे, तो उनमें कर्ण का चित्र भी था, और उसी वक्‍त द्रौपदी कर्ण के चित्र देखकर पसंद करने लगी थी।

जब राजा द्रुपद ने द्रौपदी के स्वयंवर के कई महान राजाओं और योद्धाओं भुलाया तो उनमें पांडवों में भी शामिल थे. जब स्वयंवर में एक कठोर निर्णय लेते हुए कर्ण को सूतपुत्र कहकर अपमानित किया. इससे कर्ण को बहुत आघात पहुंचा कि द्रौपदी जैसी निडर और क्रांतिकारी सोच रखने वाली स्त्री उनका जाति के आधार पर इस तरह अपमान कैसे कर सकती है। लेकिन इसके पीचे द्रौपदी को उनके पिता राजा द्रुपद ने भीष्म से प्रतिशोध लेने की प्रतिज्ञा को पूरा करने के लिए उसने ये सब किया था।

इसके बाद द्रौपदी ने पांडवों से विवाह कर लिया. और विवाह के बाद भी कर्ण को अपने मन से निकाल नहीं पाई थी. द्रौपदी से विवाह न होने के बाद कर्ण ने दो विवाह किए थे. जब दुशासन को द्रौपदी के वस्त्र हरण कर रहा था, तो मौजूद कर्ण से सहायता की उम्मीद थी. लेकिन आत्मग्लानि के कारण द्रौपदी ने कर्ण से सहायता नहीं मांगी. और कर्ण भी स्वयंवर में अपने अपमान का प्रतिशोध लेने के लिए मौन रहे थे।

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