यहां रात को जो रूका, वो नहीं देख पाया सुबह का सूरज

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मैहर शारदा माता का एक प्रसिद्ध मंदिर है। जिला सतना की मैहर तहसील के समीप त्रिकूट पर्वत पर मैहर देवी का मंदिर है। इस मंदिर में दर्शन के लिए हर वर्ष लाखों की भारी भीड़ जमा होती है। वहां शारदा देवी की पत्थर की मूर्ति के पैर के पास ही स्थित एक प्राचीन शिलालेख है। यहां शारदा देवी के साथ भगवान नरसिंह की एक मूर्ति है।

इन मूर्तियों को नापुला देवा द्वारा शक 424 चैत्र कृष्ण पक्ष पर 14 मंगलवार, विक्रम संवत 559 अर्थात 502 ई. में स्थापित किया गया था। स्थानीय परंपरा के अनुसार लोग माता के दर्शन के साथ- साथ दो महान योद्धाओं आल्हा और ऊदल, जिन्होंने पृथ्वी राज चौहान के साथ भी युद्ध किया था का भी दर्शन अवश्य करते हैं। उनसे जुड़ा वास्तु यहां मौजूद है। माना जाता है कि आल्हा को 12 साल के लिए शारदा देवी के आशीर्वाद से अमरत्व मिला था। आल्हा और ऊदल माता के सबसे बड़े भक्त थे। आल्हा मां को शारदा माई नाम से पुकारता था इसलिए मंदिर का नाम भी शारदा माई के नाम से विख्यात हो गया।

रात्रि 2 से 5 बजे के बीच बंद रहता है मंदिर :-

मैहर माता का मंदिर सिर्फ रात्रि 2 से 5 बजे के बीच बंद किया जाता है, इसके पीछे एक बड़ा रहस्य छुपा है। ऐसी मान्यता है कि आल्हा और ऊदल आज तक इतने वर्षों के बाद भी माता के पास आते हैं। रात्रि 2 से 5 बजे के बीच आल्हा और ऊदल रोज मंदिर में आकर माता रानी का सबसे पहले दर्शन करते हैं और माता रानी का पूरा श्रृंगार करते हैं। मान्यता है कि सबसे पहले दर्शन तथा श्रृंगार का अवसर माता रानी सिर्फ उन्हें ही देती हैं। अगर इस समय मंदिर में कोई व्यक्ति प्रवेश कर जाए तो उसकी मृत्यु निश्चित है। इसलिए रात के समय इस मंदिर में प्रवेश वर्जित है। यदि कोई व्यक्ति रात के समय यहां रूकने की चेष्टा करता है तो वह अगली सुबह नहीं देख पाता। मौत के आगोश को प्राप्त हो जाता है।

 

 

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