मैट्रिमोनियल साइटों पर नहीं बल्कि सभा लगाकर ढ़ूढ़े जाते थे दूल्हे

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भागम-भाग भड़ी इस दौड़ में लोग बेटा-बेटी की शादी को लेकर काफी चिंतित रहते हैं। यही कारण है कि लोग मैट्रिमोनियल साइटों पर अपना अपना प्रोफाइल अपलोड कर योग्य वर और कन्या तलाश रहे है। वैसे आपको जानकर आश्चर्य होगा कि विश्व का पहला मैट्रिमोनियल सभा यूँ कहे तो पहला ऑफलाइन मैट्रिमोनियल सभा बिहार में एक राजा के पहल पर लगाया गया था जो की काफी प्रसिद्ध हुआ था और वर्तमान के लिए अभी तक स्वर्णिम इतिहास बना हुआ है।

हम बात कर रहे हैं बिहार के मधुबनी जिला स्थित सौराठा सभा की, जहां कभी दुल्हों का मेला लगता था। लाखों लोग इस मेला में भाग लेने आते थे, दुल्हा मिथिला की पारंपरिक परिधान धोती, कुर्ता, दोपट्टा, पाग और आंख में काजल लगाए सज सवर कर बैठा करते थे। इस सभा के इतिहास के बारे में कहा जाता है कि राजा हरिसंह देव ने लगभग 700 साल पहले 1310 ईसवी में यह प्रथा शुरू की थी।

ताकि विवाह बंधन करने में लोगों को परेशानियों का सामना न करना पड़े। जानकार बताते हैं कि इस सभा का आयोजन सौराठ के अतिरिक्त सीतामढ़ी के ससौला, झंझारपुर के परतापुर, दरभंगा के सझुआर, सहरसा के महिषी और पूर्णिया कें सिंहासन सहित अन्य स्थानों पर भी इस मेला का आयोजन किया जाता था, जिसका मुख्य कार्यालय सौराठ हुआ करता था। वैसे अब आधुनिकता के इस दौर में इस ऐतिहासिक मेला प्रथा का आयोजन मात्र सौराठ में किया जाता है।

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